💝 कहानी: कबीर और सिया की कबीर नाम का एक अंधा लड़का था, जो बचपन से ही दुनिया को देख नहीं सका था। लेकिन उसे सुनना आता था… महसूस करना आता था… और किसी की आत्मा को छू लेना लेकिन उसे सुनना आता था… महसूस करना आता था… और किसी की आत्मा को छू लेना – ये तो उसका हुनर था। – ये तो उसका हुनर था। हर शाम की उम्मीद हर शाम वो एक पुरानेपीपल के style="background-color: transparent;"> पेड़ के नीच बैठता, बाँसुरी बजाता.. और आसमान की ओर चेहरा उठाकर कहता — “अगर कोई ऊपर है… तो मे री धुन उस तक ज़रूर पहुंचे।” परी की चुप मोहब्बत उसी जंगल में एक परी रहती थी — सिया। वो इंसानों से दूर थी, लेकिन कबीर की बाँसुरी की धुन से… वो हर शाम खिंचती चली आती। वो उसे रोज़ देखने लगी छुपकर। कभी शाखों के पीछे से, कभी झील के पार से कबीर को उसकी मौजूदगी का अहसास होता… वो रुक कर कहता — “कौन है ...
जादुई मुर्गी और गरीब किसान प्रेरणादायक हिंदी कहानी शुरुआत: मेहनतकश किसान रामू सुबह का समय था। हल्की धूप खेतों पर बिखरी हुई थी। रामू नाम का एक गरीब किसान अपने खेत में हल चला रहा था। उसके कपड़े फटे-पुराने थे और चेहरे पर मेहनत की गहरी लकीरें साफ दिख रही थीं। खेत के एक किनारे पर उसकी छोटी-सी झोपड़ी थी, जहाँ उसकी बीमार पत्नी और भूखे बच्चे बैठे इंतज़ार कर रहे थे। रामू पूरी ईमानदारी और मेहनत से काम करता था, लेकिन इतनी मेहनत के बाद भी उसे दो वक़्त की रोटी जुटाने में कठिनाई होती थी। जंगल की ओर एक दिन रामू जंगल से सूखी लकड़ियाँ काटकर लौट रहा था। तभी उसकी नज़र एक झाड़ी पर पड़ी, जिसमें कुछ हलचल हो रही थी। जब वह पास गया तो देखा कि वहाँ एक अजीब सी मुर्गी फँसी हुई थी। उसके पंख सुनहरे थे और आँखों में अजीब चमक थी। रामू ने बिना कोई सोच-विचार किए उस मुर्गी को झाड़ी से बाहर निकाला और अपने साथ घर ले आया। वह जानवरों के प्रति हमेशा दया भाव रखता था। मुर्गी का चमत्कार रामू ने मुर्गी की देखभाल की, उसका इलाज किया और प्यार से उसे पालने लगा। अगली सुबह जब वह उठा तो हैरान रह गया — उस मुर्ग...
जादुई पेड़ और आरुषि की सच्ची दोस्ती – एक भावनात्मक कहानी यह कहानी है एक छोटी सी प्यारी बच्ची की है.. नाम आरुषि । माँ-बाप अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उसकी दादी ने उसे बहुत प्यार से पाला। पर उसके जीवन में सबसे गहरी दोस्ती किसी इंसान से नहीं, गाँव के एक पुराने पीपल के पेड़ से थी। जादुई पेड़ आरुषि रोज़ उस पेड़ के पास बैठती, उससे बातें करती: “पेड़ जी, आज मैंने अकेले खाना बनाया… आप तो हमेशा यहीं रहते हो, आप मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो।” गाँव वाले कहते थे कि उस पेड़ में आत्मा है, लेकिन आरुषि को कोई डर नहीं था। वो कहती: “आप भी तो अकेले हो… जैसे मैं। हम दोनों एक जैसे हैं ना?” पेड़ को काटने की धमकी एक दिन शहर से कुछ लोग आए। उनके हाथों में नक्शे थे। उन्होंने कहा – "यहाँ मोबाइल टावर बनेगा, इसलिए इस पुराने पेड़ को काटना होगा।" गाँव वाले चुप रहे, लेकिन आरुषि का दिल टूट गया। वो दौड़कर दादी से लिपट गई: “दादी! ये पेड़ मेरा सबकुछ है! इसे कुछ हो गया तो मैं अकेली रह जाऊंगी।” वो जादुई रात पेड़ से लिपट गई। उस रात तेज़ आंधी आई। पेड़ की डालियाँ डर से का...
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