एक रोटी और जादुई बकरी: किसान रघु की अनसुनी कहानी
एक शाम, जब सूरज ढल रहा था, तभी एक कमजोर और भूखी बकरी उसके दरवाज़े पर आई।
बकरी के लिए आख़िरी रोटियाँ…
रघु ने बिना सोचे-समझे, वो सारी रोटियाँ उस बकरी को खिला दीं।
भूख से तड़पता था, लेकिन किसी और की भूख को पहले मिटाया।
रात गहरी हो चुकी थी…
चमत्कार की रात…
उसी रात, वही बकरी फिर लौटी। लेकिन इस बार वह… इंसानी आवाज़ में बोली।
रघु, मैं एक जादुई बकरी हूँ।
तूने मेरा दिल छू लिया है।
कल सुबह मेरा दूध तांबे के बर्तन में निकालकर पीना…
तेरी सारी बीमारी और दुख मिट जाएंगे।"
रघु हैरान था… पर उम्मीद फिर से जागी थी।
अगली सुबह की रोशनी…
सवेरा हुआ। रघु ने बकरी का दूध तांबे के बर्तन में निकाला और पी लिया।

उसका शरीर पहले से हल्का लगने लगा।
चेहरे पर चमक लौट आई।
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कुछ ही दिनों में उसका शरीर स्वस्थ हो गया।
उसका बंजर खेत हरा-भरा हो उठा।
झोंपड़ी की जगह एक सुंदर सा घर बन गया।
सीख क्या मिलती है?
👤 Author: Md Mustkim Alam
I’m a digital content creator in the crypto space since 2017 and a creative songwriter since 2014. I share expert insights, tutorials, and safety tips related to cryptocurrency and Web3 through blogs and videos.
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